बुधवार, 1 जून 2011

खुद जिम्मेदार हैं हम

प्रिय रविन्द्र, 
बात कड़वी है. लेकिन सच्ची भी है.

हमारे साथ वही हुआ है, वही हो रहा है और वही होगा जिसके हम पात्र हैं.

अगर हम चाहते हैं कि हमारे साथ कुछ बेहतर हो तो हमें अपनी पात्रता बेहतर बनानी होगी.
कृष्णं शरणमं मम्


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें