कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है।
मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है।
तवायफ फिर भी अच्छी कि वो सीमित है कोठे तक;
पुलिस वाला तो चौराहे पर वर्दी बेच देता है।
पुलिस वाला तो चौराहे पर वर्दी बेच देता है।
जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी;
जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है।
जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है।
कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान है जिस पर;
बनाकर वीडियो उसका वो प्रेमी बेच देता है।
बनाकर वीडियो उसका वो प्रेमी बेच देता है।
ये कलयुग है कुछ भी नामुमकिन नहीं इसमें;
कली, फल फूल, पेड़ पौधे सब माली बेच देता है।
कली, फल फूल, पेड़ पौधे सब माली बेच देता है।
किसी ने प्यार में दिल हारा तो क्यूँ हैरत है लोगों को;
युद्धिष्ठिर तो जुए में अपनी पत्नी बेच देता है।
युद्धिष्ठिर तो जुए में अपनी पत्नी बेच देता है।
अजीब है न हमारे देश का संविधान!
'गीता' पर हाथ रखकर कसम खिलायी जाती है सच बोलने को;
मगर 'गीता' पढ़ाई नहीं जाती सच को जानने के लिये!
'गीता' पर हाथ रखकर कसम खिलायी जाती है सच बोलने को;
मगर 'गीता' पढ़ाई नहीं जाती सच को जानने के लिये!
धन से बेशक गरीब रहो पर दिल से रहना धनवान;
अक्सर झोपडी पे लिखा होता है "सुस्वागतम"
महलों के दरवाजे पर "कुत्ते से सावधान" लिखा होता है।





