रविवार, 16 नवंबर 2014

"कुत्ते से सावधान" लिखा होता है

कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है। 
मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है। 
तवायफ फिर भी अच्छी कि वो सीमित है कोठे तक;
पुलिस वाला तो चौराहे पर वर्दी बेच देता है। 
जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी;
जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है। 
कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान है जिस पर;
बनाकर वीडियो उसका वो प्रेमी बेच देता है। 
ये कलयुग है कुछ भी नामुमकिन नहीं इसमें;
कली, फल फूल, पेड़ पौधे सब माली बेच देता है। 
किसी ने प्यार में दिल हारा तो क्यूँ हैरत है लोगों को;
युद्धिष्ठिर तो जुए में अपनी पत्नी बेच देता है। 
अजीब है न हमारे देश का संविधान!

'गीता' पर हाथ रखकर कसम खिलायी जाती है सच बोलने को;
मगर 'गीता' पढ़ाई नहीं जाती सच को जानने के लिये!
धन से बेशक गरीब रहो पर दिल से रहना धनवान;
अक्सर झोपडी पे लिखा होता है "सुस्वागतम" 
महलों के दरवाजे पर "कुत्ते से सावधान" लिखा होता है। 

क्या ऐसा होता है प्यार!

क्या ऐसा होता है प्यार!
झूठे हैं इतिहासकार!

ताजमहल को प्यार की निशानी बता दिया।
जरा गौर करें-

* शाहजहाँ की 7 बेगमों में मुमताज चौथी थी।
(बाद की तीन शादियाँ क्या मुहब्बत के गम को भुलाने के लिए की ?)

* शाहजहाँ ने मुमताज को पाने लिए उसके ख़सम को मार डाला था।
(कितनी शानदार नजीर पेश की है प्यार जताने की!)

* मुमताज अपने 14 वें बच्चे को जन्म देते समय गुजर गयी।
(खैर, मुगलों के लिए तो औरतें बच्चे पैदा करने की मशीन ही होती हैं। )

* मुमताज की मौत के बाद शाहजहाँ ने उसकी बहन से निकाह कर लिया।
(ताकि उसकी रूह को तसल्ली हो कि उसकी काम-से-कम एक सौत तो बहन ही है।)

अब इसमें जिसे प्यार का तराना सुनाई देता हो उसे प्रामाणिक इतिहासकार कहें या कमीना अफीमची?

शनिवार, 9 अगस्त 2014

मुहूर्त की ढकोसलेबाजी का प्रतिकार करें!

मैं दुनिया की तमाम बहनों से आग्रह करता हूँ कि 
वे इस तथाकथित 'भद्रा' के निषिद्ध काल में 
मुझे राखी बांधें और 
भाई-बहन के बीच रक्षा के आग्रह आधारित इस पावन पर्व में 
मुहूर्त की ढकोसलेबाजी का प्रतिकार करें!

शनिवार, 19 जुलाई 2014

गुरुवार, 17 जुलाई 2014

'सोगर' में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

कल शनिवार, 19 जुलाई 2014, से भरतपुर के निकट 

'सोगर' में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा 

का शुभारम्भ हो रहा है।

सभी भक्तजनों को सादर आमंत्रण है। 

सोमवार, 14 जुलाई 2014

प्रेम दान

एक आदमी रास्ते से गुजर रहा है और एक भिखमंगे ने उसके सामने हाथ फैलाया। 

उस आदमी ने अपनी जेबें तलाशी। संयोगवश कुछ था नही उसके पास।

उसने भिखमंगे के हाथ में अपना हाथ रख दिया और कहा: भाई! मुझे क्षमा कर। अभी मेरे पास कुछ भी नहीं। कल जब आऊंगा तो जरूर कुछ लेकर आऊंगा।
उस भिखमंगे की आंखें गीली हो गयी। उसने कहा अब लाने की कोई जरूरत नहीं; जो देना था, तुमने दे दिया।

तुमने मेरे हाथ में हाथ रखा। ऐसा करनेवाले तुम पहले आदमी हो। तुमने मुझे भाई कहा; तुम मेरे पहले दाता हो। अब और कुछ की जरूरत नहीं।

बस, मेरे पास दो घड़ी बैठ जाओ। यह हाथ मेरे हाथ में रहने दो। यह पहला हाथ है, जो मेरे हाथ में आया। धन देने वाले तो बहुत मिले हैं, प्रेम देने वाला कोई भी नहीं मिला। और भाई तो मुझे किसी ने कहा ही नहीं। यह शब्द कितना प्यारा है!

वह भिखमंगा कहने लगा—इसमे कितना मधुरस है! तुमने मुझे सब दे दिया। कभी यहां से गुजरो, तो मेरे हाथ में हाथ देकर क्षण भर बैठ जाया करे। फिर कभी मुझे भाई कहकर पुकारना।

तुम्हारे पास कुछ हो ना हो! किसी को भाई कहकर तो पुकार सकते हो। 


इतने कृपण तो मत हो जाओ कि किसी को प्रेम देना भी कठिन हो जाये! भाई कहना भी मुश्किल हो जाए!

गुरुवार, 3 जुलाई 2014

हरियाली (गुप्त) नवरात्रि


प्रथमं     शैलपुत्री  च   द्वितीयं  ब्रह्मचारिणी। 
तृतीयं चन्द्रघण्टेति   कूष्माण्डेति  चतुर्थकम्।।

पञ्चमं स्कन्दमातेति   षष्ठं कात्यायनीति च। 
सप्तमं कालरात्रीति    महागौरीति चाष्टमम्।।

नवमं   सिद्धिदात्री  च   नवदुर्गाः    प्रकीर्तिताः।