बुधवार, 30 अक्टूबर 2013
2 नवम्बर, 'रूप चतुर्दशी' की पावन वेला में श्री शुभ 'सुन्दरकाण्ड' का सामूहिक पाठ
आगामी शनिवार, 2 नवम्बर 2013, को 'रूप चतुर्दशी' (लक्ष्मी-चौदस) की पावन वेला में बालाहेड़ी 'श्री लाल बाबा के आश्रम' पर श्री शुभ 'सुन्दरकाण्ड' का सामूहिक पाठ आयोजित किया गया है।
श्री शुभ मुहूर्त में आयोजित यह पाठ आपको आपकी समस्त बिघ्न-बाधाओं, रोग-शोक, ब्याधि, धन-दौलत सम्बंधित और अन्य पारिवारिक रोजमर्रा की परेशानियों से मुक्ति पाने का सुनहरा अवसर है।
समय रात के ठीक 7 बजे से।
अनुमानित पाठ विश्राम रात के 9 बजे।
भक्तजनों से आग्रह है कि शुभ-मुहूर्त (समय) का विशेष ध्यान रखें!
शुक्रवार, 16 अगस्त 2013
मंगलवार, 1 मई 2012
यज्ञ हमारा धर्म है
अपने कर्मों के फल को लक्ष्य में न रखते हुए,
कर्म को अपना सहज कर्तव्य मान कर करते रहना ही 'यज्ञ' है।
इसका मतलब यह नहीं है कि कर्म तो हम करें और फल
कोइ और ले जाये।
कोइ और ले जाये।
इसका मतलब है कि कर्म करो, जो मिलना है वह तो मिलेगा।
फ़ल कई बाहरी कारकों के आधीन है जिन पर हमारा वश नहीं चलता।
और जिस पर हमारा वश नहीं उसकी चिंता बेकार है।
फिर क्यों व्यर्थ की आस करो?
अपना कर्म करते चलो, फल जो आना होगा आएगा।
फिर क्यों व्यर्थ की आस करो?
अपना कर्म करते चलो, फल जो आना होगा आएगा।
शनिवार, 14 अप्रैल 2012
Just Drop "I" n' "Want" To Be "Happy."
Someone once asked Lord Buddha-
Lord! I want to be happy. Is there a way?
Buddha replied-
Just drop "I" and "Want" and you are "Happy."
"I" denotes we have "ego",
The perennial mother of all the Worldly Problems.
Similarly, "Want" denotes the never exhausting "Desires."
Unless we get rid of these two, we simply can never be Happy.
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